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Raksha Bandhan 2022 : यूपी के इस धार्मिक शहर में गंगा स्नान और श्रावणी उपाकर्म के बाद ब्राह्मण बांधते हैं एक दूसरे को रक्षा

Raksha Bandhan 2022 श्रावण पूर्णिमा तिथि पर 12 अगस्त को गंगा स्नान का विशेष महत्व है। काशी में इसी दिन हैवग्रीव उत्पत्ति सायंकाल में दर्शन पूजन का विशष विधान है। प्राचीन परंपरा अनुसार ब्राह्मण वर्ण इसी दिन श्रावणी मनाता है। बच्चों की आठ वर्ष की आयु पूरी होते ही नदी तट पर गुरु अपने शिष्यों के साथ प्रातः श्रावणी उपाकर्म से मंत्रोच्चार द्वारा संपादित कर ऋषि पूजन किया जाता है। यज्ञोपवीत पूजन का भी विधान है जिसे वर्ष भर पहना जाता है। इसके साथ ही एक दूसरे को रक्षा सूत्र बांधते हैं।

लोकोचार में ब्राह्मण अपने यजमानों को रक्षा कवच बांधते हैं

अद्भुत परंपराओं के देश भारत में सनातन धर्मावलंबियों के चार महत्वपूर्ण पर्व त्योहारों में से रक्षाबंधन एक है। यह भाई बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षा पर्व है। वैसे तो वर्ण व्यवस्था अनुसार यह प्रमुख पर्व ब्राह्मणों का रहा है। लोकोचार में इसका स्वरूप विस्तृत हो गया। इस पर्व पर बहन अपनी रक्षा के लिए अपने भाई को तिलक लगा कर पूजन कर मिष्ठान खिलाने के बाद रक्षा सूत्र इस कामना के साथ बांधती है कि वह जीवन पर्यंत उसकी रक्षा करे, इसके बदले भाई भी अपनी बहन को कुछ उपहार स्वरूप भेंट करता है। लोकोचार में ब्राह्मण अपने यजमानों को रक्षा कवच बांधते हैं।

पूर्णिमा पर 11 अगस्त को भद्रा प्रातः 9.35 बजे लग रही जो रात 8.25 बजे तक रहे

सनातन धर्म में रक्षा बंधन पर्व सावन पूर्णिमा को मनाया जाता है। देखा जाए तो इस बार सावन पूर्णिमा दो दिन लग रही है। 11 अगस्त को व्रत की पू्र्णिमा तो स्नान दान की पूर्णिमा 12 अगस्त को होगी। श्रावण पूर्णिमा तिथि 11 अगस्त को सुबह 9.35 बजे लग रही है जो 12 अगस्त को प्रातः 7.16 बजे तक रहेगी। वहीं सावन पूर्णिमा पर 11 अगस्त को भद्रा प्रातः 9.35 बजे लग रही जो रात 8.25 बजे तक रहेगी।

ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार रक्षा पर्व मनाने के लिए धर्म सिंधुकार ने कहा है कि -रक्षा बंधन मस्यामेव पूर्णिमायां भद्रा रहितायां त्रिमुहुर्ताधिकोद्ययापिन्यामपराह्णे प्रदोषेवाकार्यं। उदये त्रिमुहुर्तन्यूनत्वे पूर्वेदुभद्रारहितेप्रदोषादिकाले कार्यं।। तो वहीं तत्सत्वे तू रात्रावति तदन्ते सूर्यादिति निर्णायमिते। ईदम प्रतिपदुतायाम् कार्यंं।। अर्थात् देखा जाए शास्त्र के अनुसार इस बार रक्षा पर्व 11 अगस्त को रात 8.26 बजे से 12 अगस्त को सुबह 7.16 बजे तक किया जा सकेगा।

12 अगस्त को 7.16 बजे के बाद भाद्र कृष्ण प्रतिपदा प्रारंभ हो जाएगी

12 अगस्त को 7.16 बजे के बाद भाद्र कृष्ण प्रतिपदा प्रारंभ हो जाएगी जो शास्त्रानुसार रक्षा पर्व के लिए निषेधित है। वहीं उदयातिथि में 12 अगस्त को पूर्णिमा मिलने से वैदिक विप्र अपनी शाखा की परंपरा अनुसार इसी दिन श्रावणी उपाकर्म करेंगे। संस्कृत दिवस 11 अगस्त को मनाया जाएगा। हैग्रीयो उत्पत्ति काशी के भदैनी स्थित मंदिर में दर्शन-पूजन किया जाएगा।

विशेष मुहूर्त

11 अगस्त को रात 8.26 से 11.30 बजे तक

12 अगस्त को सुबह 5.30 से 7.16 बजे तक

मंत्र

येन बद्दो बलि राजा दानवेंद्रो महाबलः, तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:। अर्थ यह कि जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेंद्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षाबंधन से मैं तुम्हें बांधता हूं। यह तुम्हारी रक्षा करेगा।

Author

  • Mrityunjay Singh

    Mrityunjay Singh is an Indian author, a Forensic expert, an Ethical hacker & Writer, and an Entrepreneur. Mrityunjay has authored for books “Complete Cyber Security eBook”, “Hacking TALK with Mrityunjay Singh” and “A Complete Ethical Hacking And Cyber Security” with several technical manuals and given countless lectures, workshops, and seminars throughout his career.

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Mrityunjay Singh

Mrityunjay Singh is an Indian author, a Forensic expert, an Ethical hacker & Writer, and an Entrepreneur. Mrityunjay has authored for books “Complete Cyber Security eBook”, “Hacking TALK with Mrityunjay Singh” and “A Complete Ethical Hacking And Cyber Security” with several technical manuals and given countless lectures, workshops, and seminars throughout his career.

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